2 Best Yadi Main Pradhanmantri Hota Essay in Hindi | यदि मैं प्रधानमंत्री होता

हैल्लो दोस्तों कैसे है आप सब आपका बहुत स्वागत है इस ब्लॉग पर। हमने इस आर्टिकल में Yadi Main Pradhanmantri Hota Essay in Hindi पर 2 निबंध लिखे है जो कक्षा 5 से लेकर Higher Level के बच्चो के लिए लाभदायी होगा। आप इस ब्लॉग पर लिखे गए Essay को अपने Exams या परीक्षा में लिख सकते हैं

10 Lines on यदि मैं प्रधानमंत्री होता | 10 Lines on Yadi Main Pradhanmantri Hota

  1. हमारे देश में प्रधानमंत्री देश का सर्वेसर्वा होता है। वह प्रजातांत्रिक भारत सरकार का मुखिया होता है।
  2. वह देश की समस्त समस्याओं का निराकरण करता है। वह देश की सरकार को सही ढंग से चलाने में एक पायलट की भांति कार्य करता है।
  3. यदि मैं प्रधानमंत्री होता, तो मैं अपना जीवन मानवता की सेवा में समर्पित कर देता।
  4. मैं देश को एक सुनियोजित आर्थिक विकास कार्यक्रम प्रदान करता मैं गरीबी, निरक्षरता, तथा बेरोजगारी को दूर करने का हर संभव प्रयास करता।
  5. मैं संप्रदायिक सामजस्य को बनाए रखने के लिए तथा इसे बढ़ाने के लिए कार्य करता। आतंकवाद को समाप्त करने के लिए यथाशीघ्र प्रयत्न करता।
  6. मैं जमाखोरों, कालाबाजारीयों, मिलावटकर्ता तथा तस्करों तथा घूसखोरों के लिए अलग से कानून बनाता।
  7. यह प्रयास करता कि समाज विरोधी तत्व किसी भी हाल में कानून को धोखा ना दे पाए।
  8. मैं प्रेस तथा न्यायालय ने को पूर्ण स्वतंत्रता प्रदान करता। मैं कृषि, यातायत तथा उद्योग में सुधार करता।
  9. बढ़ती कीमतों को रोकने के लिए कानून बनाता। जिससे गरीब को भी दो वक्त की रोटी मिल सके।
  10. यदि मैं देश का प्रधानमंत्री होता तो मैं यह सबसे महत्वपूर्ण काम जरूर करता, हमारे समाज हो रहे बलात्कार को कम करने के लिए कड़ा से कड़ा कानून बनता।

यदि मैं प्रधानमंत्री होता | Yadi Main Pradhanmantri Hota (800 Words)

प्रस्तावना

आचार्य शुक्ल ने कहा है जो जितना ऊपर देखते हुए तीर छोड़ता है उतना ही तीर दूर जाता है। जो जितनी सम्भव कल्पना करता है और उसी के अनुरूप कार्य करता है वही व्यक्ति सफल होता है। अतः मनुष्य को यथासम्भव उन्नत-विचार रखने चाहिए और केवल कल्पना ही नहीं अपितु कल्पना को साकार रूप देने के लिए अथक प्रयास करना चाहिए। इस विषय पर प्रधानमंत्री श्री चरण सिंह चौधरी जी ने कहा था कि जो आगे बढ़ने का प्रयास नहीं करता है वह घटिया किस्म का व्यक्ति है। प्रधानमंत्री की कल्पना मात्र से सुखद स्फुरण हो उठता है।

प्रधानमन्त्री होने पर प्रधानमंत्री को कितने सुखद आनन्द की अनुभूति होगी, उसकी सहज कल्पना नहीं की जा सकती। यदि प्रधानमंत्री का दायित्व सँभालने को मिले तो मैं कर सकता हूँ – यह विचारणीय है।

शिक्षा और नैतिक-पतन के कारण ढूँढ़ना

शिक्षा के निरन्तर गिरते हुए स्तर और नैतिक पतन के कारणों के विषय में सुविज्ञ नीति रखने वाले व्यक्ति की सलाह पर शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए प्रयास करता। आरकक्षण के कारण घटती हुई प्रतिस्पर्धात्मक गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए प्रयास करता। आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों की शिक्षा के लिए पूर्ण प्रयास करता नैतिक – पतन का जो घिनौना दृश्य आज सर्वत्र दिखाई दे रहा है सर्वत्र उद्दण्डता, उच्छृखलता, बे रोक-टोक फैल रही है, उस पर शीघ्र दण्डात्मक विधान होता। उनके आचरण से राष्ट्र की संस्कृति विद्रूप होती जा रही है, उस पर लगाम लगा देता। यदि मै प्रधानमंत्री होता तो नारी शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाता।

बेरोजगारी की समस्या

नैतिक पतन के कारण सड़कों से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक भ्रष्टाचार की प्रथा स्पीड से चल पड़ी है, उसके सुधार की ओर विशेष प्रयास किए जाते। आज बेरोजगारी की समस्या मुंह बाए खड़ी है उसका हल निकाल लिया जाता। उन्हीं लोगों को नौकरी की वरीयता दी जाती जो कम जनसंख्या के नाम पर वचन-बद्ध होते। इसके विपरीत जाने पर उनके वेतन में कटौती की जाती और विशेष परिस्थिति में सेवा से मुक्त करता। इस तरह जनसंख्या और बेरोजगारी की समस्या कम होती। इस के लिए जातीय या धार्मिक कोई समझौता न करता। सभा के प्रति एक जैसी सद्भावना रखता। देश की गरिमा कैसे बनी रहे। यह विचार सर्वोच्च होता।

देश की सुरक्षा

देश की सीमाओं पर बढ़ते आतंक को देखते हुए करो और मरो का मंत्र सैनिकों को देता। ऐसी स्थिति में पकड़े गए आतंकियों को जेल में रख कर उन्हें सुरक्षा प्रदान करते हुए न्यायिक दण्ड का विधान तुरन्त होता। केवल आतंकियों तक ही नहीं अपितु जो राष्ट्र द्रोही राष्ट्र की सम्पत्ति को विदेशों में जमा करते आ रहे हैं उनके प्रति भी वैसा ही दण्डात्मक विधान होता।

आम जनता के साथ न्याय

जनता में आज परस्पर विश्वास की भावना कम होती जा रही है। उच्च पद पर आसीन व्यक्ति अपने कर्तव्य का निर्वाह नहीं करते हैं जिससे जनता में विश्वास कम हो रहा है। न्यायिक प्रक्रिया के प्रति लोगों में यह भावना घर करती जा रही है कि कानून अन्धा है। उच्च स्तर के लोगों का अपराध करते हुए प्रमाण और गवाह के अभाव में दण्ड विधान उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाता और दूसरी और निरपराध लोग झूठी साजिश में फँस कर रह जाते हैं। इस न्यायिक प्रक्रिया में विश्वास बना रहे, ऐसे प्रयास करता।

देश की भाषा हिंदी

मैं समझता हूँ राष्ट की गरिमा, राष्ट्र की संस्कृति से प्रेम अपनी मातृभाषा के द्वारा अधिक सम्भव है। हिन्दी हमारी राष्ट्र भाषा है। प्रान्तीय भाषाओं के पढ़ने के साथ हिन्दी भाषा पर अधिक जोर देता और उच्च माध्यमिक स्तर तक हिन्दी का पठन-पाठ अनिवार्य करता। कार्यालयों में अंग्रेजी भाषा में लिखे जाने वाले पत्रों ओर आवेदन पत्रों को हिन्दी में करने के लिए कानून बनाकर बाध्य कर देता।

भर्ष्टाचारी मंत्री

राजनैतिक क्षेत्र में अयोग्य व्यक्ति भी अपनी तिकड़म से संसद तक पहुँचते ही नहीं है अपितु मंत्री पद भी हासिल कर लेते हैं। इससे राष्ट्र का अहित होता हैं। राष्ट्रीय गरिमा को ठेस पहुँचती है। राजनैतिक क्षेत्र में राष्ट्र के प्रति निष्ठा रखने वाले योग्य, सच्चरित्र पुरुष पदार्पण करें, इसके लिए मूल्य स्थापित करता। जो उन मूल्यों पर खरे उतरते उन्हें ही राजनीति प्रवेश मिल सकता। आज धनबल और बाहुबल के आधार पर संसद में या तो मूक बैठे रहते हैं या शोर-शराबा करते हैं। केवल राष्ट्रीय-कोष से मिलने वाली राहत कोष की ओर निगाह गड़ाए रहते हैं। ऐसे लोग राहत राशि का गलत इस्तेमाल करते है, इस विधान से ऐसे लोगों से संसद को मुक्त कर देता।

उपसंहार

प्रधानमन्त्री पद दायित्व है, अनेक चुनौतियों से भरा पद है। इस पद की गरिमा को बनाए रखने में वही व्यक्ति सक्षम हो सकता है जिसे राष्ट्र-हित की प्रबल इच्छा, कर्तव्य के पालन की निरन्तर कामना हो, दृढ़ इच्छा शक्ति हो। ऐसा न होने पर विरोधों, चुनौतियों से घबराया हुआ व्यक्ति समस्याओं के निपटारे की बात दूर, और नई समस्याएं खड़ी कर सकता है। मात्र कामना मात्र से कि मैं प्रधानमंत्री होता तो क्या-क्या करता ऐसी बातें शेख-चिल्ली भी करने में पीछे नहीं रह सकता है। दृढ़-इच्छा शक्ति के अभाव में परम्परा की लीक पीटने लगता है।


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