5+ Best Moral stories in Hindi | नैतिक कहानियाँ

Moral stories in Hindi के इस आर्टिकल में आप सभी का बहुत – बहुत स्वागत है। इस आर्टिकल में आपको छोटे बच्चो के लिए शिक्षाप्रद नैतिक कहानियाँ (Moral stories in Hindi) संग्रह मिलेगा।


महान आदर्श – Moral Story in Hindi

बात बहुत पुरानी है। एक राज्य था, उस राज्य में एक किसान रहता था वह बहुत ही मेहनती ईमानदार और अपने आदर्शों का पक्का था। उसके मन में तनिक भी लोग वह छल कपट नहीं था। वह अपनी मेहनत की कमाई में विश्वास रखता था।

1 दिन की बात है वह किसान अपने खेतों में हल चला रहा था एकाएक उसके हल की नोक किसी कठोर चीज से टकराई।

उसने झुक कर मिट्टी हटाई, तो उसे जमीन में गड़ा एक कलस-सा दिखाई पड़ा। किसान ने वह कलस बाहर निकाल लिया। कलश को खोलने पर उसे उसमें सोने की गिन्नीया दिखाई दी। उस गरीब किसान के लिए वह धन किसी खजाने से कम नहीं था। किंतु उस ईमानदार किसान ने उस कलस का मुंह बंद कर दिया।

उसने उस धन को छुआ तक नहीं और उसे लेकर सीधा राजा के दरबार में जा पहुंचा। राजा के सामने पहुंचे किसान ने सारी बात साफ-साफ राजा को बता दी। और सोने की गिन्नीया से भरा वह कलस भी राजा को सौंप दिया।

उसकी इमानदारी देख कर आजा चौक गया। मन ही मन राजा बहुत प्रसन्न हुआ कि ऐसे महान लोग भी उसके राज्य में है। राजा ने उस किसान से पूछा क्या तुम जानते हो कि इसकी कीमत कितनी होगी? जी हां महाराज इस सोने की गिन्नीयों की कीमत अवश्य ही हजारों रुपए होगी, किसान ने कहा।

इस पर राजा ने प्रश्न किया जब तुम इनकी कीमत जानते थे तो तुमने इन्हें अपने पास ही क्यों नहीं रख लिया? किसान ने तुरंत जवाब दिया महाराज मेरे आदर्श की कीमत इन सोने के गिन्नीयों से कहीं अधिक है। मेरे आदर्श दुनिया की किसी भी वस्तु से मूल्यवान है।

उन्हें में किसी भी कीमत पर छोड़ नहीं सकता। राजा यह सुनकर बेहद प्रभावित हुआ।

उसके बाद राजा ने उस किसान को 100 गिन्नियां लेने के लिए विनर्म पूर्वक बोला। मगर किसान ने गिन्नीया लेने से इंकार करते हुए कहा, राजन जो इनाम प्यार से के शब्द धन्यवाद में हैं, वह लाखों रुपए से भी सर्वोपरि है। यह कह कर किसान चला गया। राजा प्रशंसा भरी नजरों से उसे देखता रहा।

Moral Story : अ:त बच्चों, हमें इस कहानी से या शिक्षा मिलती है कि हमें किसी भी कीमत पर अपने आदर्श नहीं बदलने चाहिए।

Panchtantra short stories in Hindi with Moral । पंचतंत्र की कहानी


शिकार का शौक – Moral Story in Hindi

एक राजा को शिकार खेलने का बड़ा शौक था, उसके महल में कई जंगली पशु पक्षियों की खाले दीवारों पर टंगी थी।
1 दिन राजा से उसके पुत्र ने पूछा – पिताजी आप मासूम जानवरों का शिकार कर जंगल की सुंदरता को क्यों नष्ट करते हैं? राजा ने कहा बेटे जो लोग पशु पक्षियों का शिकार खेलते हैं, वह बड़े बहादुर होते हैं। और हां, पंछियों का शिकार खेलने से जंगल की सुंदरता नष्ट नहीं होती, बल्कि निर्बल पशु पक्षियों कि स्वतंत्रता मिलती है ताकि वे आसानी से जंगल की खुली वादियों में विचरण कर सकें। पुत्र अपने पिता के जवाब से संतुष्ट ना हुआ।

उसने सोचा पशु पक्षियों का शिकार करना अच्छी बात नहीं, यह आदत तो मैं छुड़ाकर रहूंगा। दूसरे दिन राजा शिकार खेलने के लिए रवाना हुआ तो पुत्र बोला पिताजी मैं भी चलूंगा शिकार पर आपके साथ।

राजा ने समझाया बेटा! जंगल का मामला है पग पग पर होशियारी रखनी पड़ती है। तनिक चूक मौत का कारण बन सकती है।

लेकिन पुत्र ने एक न सुनी वह जिद करने लगा। पुत्र को रोते देख रानी ने राजा से निवेदन किया, ले भी जाओ, इसे भी तो आपकी तरह बहादुर बनना है, या अभी से ही डरपोक रहा तो बड़ा होकर और भी दब्बू बन जाएगा।

राजा ने उसे भी घोड़े पर बैठा लिया दोनों जंगल में जा पहुंचे। तभी राजा ने एक भागते हुए प्यारे से हिरण के बारे में अपने पुत्र से कहा बेटा, जरा यह तो बताओ कि वह भागता हुआ हिरण बार-बार पीछे मुड़कर क्यों देख रहा है।

पुत्र तो इसी प्रतीक्षा में था कि उसने जवाब देने से पहले एक सवाल राजा से किया आप सच्चे क्षत्रिय हैं या नहीं। राजा ने कहा – हां हम क्षत्रिय तो है, लेकिन तुम्हारे इस सवाल के पूछने का क्या मतलब? पुत्र ने कहा हां, बस यह दौड़ता हुआ हिरण का बच्चा यही मुड़ कर देख रहा है कि आप छत्रिय हैं या नहीं? तभी राजा ने टोका, यह मुक पशु इस तरह हमारा क्षत्रिय धर्म कैसे जानेगा?

पुत्र ने जवाब दिया, यह जानता है कि सच्चा क्षत्रिय वही है जो भागते हुए किसी पशु या शत्रु पर भी प्रहार नहीं करता। अपने पुत्र की इस बात से राजा का हृदय उसी दिन से परिवर्तित हो गया और उसी दिन उसने शिकार ना खेलने की कसम ले ली। पुत्र अब बहुत खुश था क्योंकि वह अपने पिता का शिकार खेलने का शौक छुड़ा चुका था।

Moral Story : अतः हम लोगों को भी यह सोच रखनी चाहिए कि पशु पक्षियों पर दया करें।


गधे की आँख – नैतिक कहानियाँ

किसी गाँव में एक कुम्हार रहता था, उसके पास एक गधा था, वह गधा ही उसके परिवार की रोजी रोटी का साधन था। कुम्हार गाँव के दुकानदारों का माल शहर से गधे पर लादकर गांव ले आता था । इस प्रकार जो पैसे मिलते, उनसे वह अपने परिवार का गुजारा चला रहा था। परंतु समय एक जैसा नहीं रहता।

अचानक एक रात कोई चोर उसके गधे को चुरा कर ले गया । कुम्हार ने उसे ढूंढने की बहुत प्रयत्न किया परन्तु गधे का कहीं पता न चला । गधे के बिना उनका काम नहीं चल सकता था। अतः मजबूर होकर उसने दूसरा गधा खरीदने का विचार बनाया और एक सेठ से कुछ रुपये उधार लेकर नया गधा खरीदने के लिए पशुओं की मंडी की और चल पड़ा।

मंडी पहुंच कर उसने देखा कि उसका चोरी हुआ गधा लिए एक आदमी उसे बेचने के लिए एक स्थान पर खड़ा है । उसने गधे को पहचान कर उस आदमी से कहा- यह गधा तो मेरा है, तुम इसे चोरी करके ले आए हो । मुझे मेरा गधा वापस दे दो, नहीं तो मैं शोर मचा दंगा । कुम्हार की बात सुनकर उस आदमी ने कहा- यह

गधा मेरा है, तू झूठ बोलकर उसे अपना बनाना चाहता है मेरी चीज है, मैं तुझे कैसे दे दूँ। जो करना है कर लो उनका झगड़ा सुनकर काफी लोग वहाँ इकटठा हो गए। दोनों की बातें जानकर काफी लोगों ने पूछा-तुम्हारे पास अपना पक्ष सही सिद्ध करने के लिए कोई सबूत है? कुम्हार की बुद्धि काम कर गयी।

उसने तुरंत एक कपड़े से गधे की आँखों पर पट्टी बाँध दी और लोगों से कहा, मेरा गधा एक आँख से अंधा है। यदि यह इसका है तो इसे भी यह पता होगा कि उसे किस आँख से दिखाई नहीं देता। उस आदमी ने तुरंत कहा- हाँ, हाँ इसे दाई आँख से दिखाइए नहीं देता। उस आदमी फिर तुरंत बात बदल कर बोला, नहीं, नहीं वह बायीं आँख से अंधा है।

कुम्हार की चाल काम कर गयी । उसने गधे की आँखों से पट्टी खोलकर लोगों से कहा-आप भी देख लीजिए कि गधा अंधा है या उसकी दोनों आँखों से ठीक से देख सकती हैं। लोगों ने देखा, कि गधे की दोनों आँखें ठीक हैं । उन्होंने कुम्हार की बुद्धि और चतुराई की प्रशंसा की और उस आदमी से कहा- तुम झूठे हो, गधा तुम्हारा नहीं है।

गधा कुम्हार को दे दो। नहीं तो हम तुम्हें पुलिस के हवाले कर देंगे। चोर ने गधा कुम्हार के हवाले कर दिया और लोगों से अपने झूठ और चोरी के लिए क्षमा माँगी। कुम्हार अपना गधा लेकर खुशी-खुशी घर आ गया।


चतुर सियार – शिक्षाप्रद कहानियाँ

एक गांव के पास एक सियार और सियारिन रहती थी, वह अपने घर की तलाश में निकले इन्हें एक शेर की मांद मिली और उसमें वह रहने लगे। जब शेर वन से लौटा तब सियार और सियारिन ने देखा कि शेर आ रहा है तो सियार कप-कपाने लगा। तब सियारिन ने कहा कि तुम कहा करते थे कि अकल से काम लेने पर काम होता है।

सियार ने कहा कि सुन सियारनी! जब हमारे पास शेर आएगा, तब मैं तुमसे पूछंगा कि तेरे बच्चे क्यों रो रहे है। तब तू कहना कि बच्चे खाने के लिए शेर मांग रहे हैं।

सियारिन ने ऐसा ही किया, शेर ने सोचा उसके बच्चे तो शेर मांग रहे है तो इसके पिता कितने पहलवान होंगे। यह सुन शेर डर कर चला गया।

जब शेर फिर आया तो सियार बोला कि तेरे बच्चे तो रोज-रोज रोते है इतने शेर कहां से लाऊं।

शेर सियारिन की तरफ बढ़ा तो सियारिन बोली कि ये ले शेर, यह सुनकर शेर भाग गया।

शेर एक बन्दर के पास पहुंचा तो शेर बोला कि भाई ! हमारी मांद में एक सियार-सियारिन रहने आ गए हैं। उन्हें भगाना है, कोई उपाय बता । बंदर बोला कि तुम मुझे अपनी पूंछ से बाँध ले। शेर ने उसको अपनी पूंछ से बाँध लिया।

वह अपनी मांद की ओर बढ़ा तो सियार बोला कि बन्दर को मैंने दो शेर लाने को कहा था लेकिन वह एक शेर ही ला रहा है। शेर यह सुनकर वन की तरफ भागा तो बन्दर घिसटकर मर गया और शेर उसी वन में भाग गया और सियार-सियारिन उसी मांद में रहने लगें।


लालच बुरी बला हैं – Moral Stories in Hindi

एक मजदूर जब वृद्ध हो गया और मजदूरी करने की उसमें सामर्थ्य न रही, तो पेट भरने के लिए उसने कोई रोजगार करना चाहा। मजदूर गरीब तो था ही, रोजगार के लिए उसके पास रुपया कहाँ था? बगैर रुपये रोजगार कैसे हो सकता था?

खूब सोच-विचार के बाद एक-सौ रुपये कर्ज लेकर उसने कुछ मुर्गियां खरीद ली। मुर्गियां जो अंडे देती, उन अण्डों को बेचकर वह अपने बाल-बच्चों का पालन करने लगा।

उन मुर्गियों में उसे एक ऐसी मुर्गी मिल गई, जो रोज एक सोने का अंडा देती थी। मजदूर रोज सोने का अंडा पाकर बड़ा खुश था। वह उस अंडे को रोज बेच देता और बड़े आराम के साथ बाल-बच्चों की गुजर करता था।

एक दिन उसने सोचा, मुर्गी रोज सोने का एक ही अंडा देती है, एक अंडे को बेचकर मैं अपने बाल-बच्चों का पेट ही पाल सकता हूँ, उससे ज्यादा पैसा नहीं मिल सकता। अगर एक साथ अधिक सोने के अंडे मिल जाये तो उन्हें पाकर मैं अमीर बन सकता हूँ।

ऐसा सोच-विचार कर वह ज्यादा अंडे पाने के लिए उतावला हो गया, उसी उतावलेपन में उसने अधिक अंडे पाने की गरज से उस मुर्गी का पेट चीर डाला। पेट चीरने पर ज्यादा अंडे मिलना तो दूर, उसे जो एक अंडा मुर्गी रोजाना देती थी वह भी नहीं मिलने लगा, बल्कि वह मुर्गी भी मर गयी।

मुर्गी के मर जाने पर वह मजदूर बहुत दुखी हुआ और अपनी समझ को कोसने लगा। वह मन में कहने लगा-‘यदि मैं लालच न करता तो मुर्गी क्यों मेरे हाथ से जाती?’

Moral Story : सच है-लालच बुरी बला है।


लोभ का फल – Moral Story in Hindi

पुराने जमाने में दिल्ली में सहसरूप नामक एक व्यक्ति रहता था। यमुना नदी में जाल फेंक कर मछली पकड़कर उन्हें बाजार में बेचकर उससे होने वाली आमदनी से अपने परिवार का बड़े आराम से गुजारा चलाता था। इतने में ही उसका परिवार सुखी और संतुष्ट था।

एक दिन उसने यमुना नदी के घाट पर जल में जाल फेंका तब एक भी मछली उसके जाल में नहीं फंसी।
अबकी बार उसने जाल फेंका तब उसके जाल में एक बहुत बड़ा कछुआ फंस गया। तब उसने सोचा कि इसी को बाजार में बेच दूं तो कुछ आमदनी हो जाएगी।

वह कछुए को अपने थैले में डालने लगा तो कछुआ बोला दोस्त मुझे बेचकर तुम्हें कितनी आमदनी हो जायेगी ? मुझे एक बार तुम अपने घर तक जाने दो मैं तुम्हारे लिये एक वेश कीमती रत्न लाकर दूंगा।

जिससे तुम जिन्दगी भर बड़े आराम से खाओगे तो भी नहीं घटेगा। उसने कछुए पर विश्वास करके उसे जल में छोड़ दिया। कछुआ पानी में घुसकर अपने घर तक पहुँच कर एक लाल मणि लाकर सहसरूप को सौंप दिया।

लाल मणि की लाल रोशनी ने उसे चकरा दिया। सहसरूप के दिल में एक दूसरा लाल मणि और पाने की लालसा जाग गई। उसने उस लाल मणि को अपनी जेब में -डाल लिया और कछुए को एक दूसरा लाल और लाने को कहा।
कछुआ भी चतुर था, उसने उसके अति लोभ को भांप लिया। कछुए ने उसे सबक सिखाने का विचार कर कहा-मेरे प्यारे दोस्त मेरे घर में तरह-तरह के लाल मणि भरे पड़े हैं तुम मुझे यह लाल मणि दे दो ताकि में इससे मिलान करके लाने में कामयाब हो सकू।

सहसरूप ने वह लाल दूसरे लाल को पाने के लोभ में कछुए को लाल मणि दे दिया।
कछुआ लाल मणि को लेकर यमुना के गहरे जल में गोता लगाकर गहराई में लाल मणि रखकर पानी से बाहर आकर सहसरूप से बोला, मेरे लालची दोस्त तुमने दूसरे लाल मणि को पाने के चक्कर में पहला लाल मणि भी अपने हाथ से खो दिया।

अब वह लाल मणि को खोने के गम में घाट पर बैठकर रोने लगा। कछुआ तो कहकर पानी के अन्दर समा गया। | वह अपने आप में पश्चाताप करने लगा। काश! मैंने लोभ न किया होता तो यह दुख नहीं देखना पड़ता।
उसने सौगंध खाई कि भविष्य में कभी भी लोभ नहीं करूंगा।


तो दोस्तों आप यह Moral stories in Hindi कैसा लगा। कमेंट करके जरूर बताये। अगर आप किसी अन्य कहानी को पढ़ना चाहते है जो इसमें नहीं तो वो भी बताये। हम उसे जल्द से जल्द अपलोड कर देंगे।

Leave a Comment