1 Best Essay on cinema in Hindi | सिनेमा या चलचित्र से लाभ और हानियाँ

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सिनेमा या चलचित्र से लाभ और हानियाँ पर निबंध | Essay on cinema in Hindi

Cinema से लाभ और हानियाँ विविध क्षेत्रों में विज्ञान ने मानव जीवन को सुखी बनाने के लिए असंख्य साधन प्रदान किये हैं। सिनेमा आधुनिक युग का मनोरंजन का प्रसिद्ध साधन है। देश के सब छोटे-बड़े नगरों में इसका बोलबाला है। इससे अनेक लाभ और अनेक हानियाँ हैं।

सिनेमा मनोरंजन का सस्ता-सुलभ साधन है। हर पारी में सैकड़ों लोग कर्सियों पर बैठ कर तीन घटे में आर थाड़ा धन खर्च करके सिनेमा का आनन्द प्राप्त करते हैं। नाटक में कई दश्य जो नहीं दिखाए जा सकते वे सिनमा मदिखाए सकते हैं। इसमें गीत, संगीत, वार्तालाप, युद्ध और प्राकृतिक दृश्यों द्वारा मनोरंजन प्रदान किया जाता है। सिनमा का पर बहुत प्रभाव पड़ता है। इसे हम न केवल आँखों से देख सकते हैं, बल्कि कानों से भी सुन सकत है।

मनोरजंन के साथ-साथ यह ज्ञानवर्धन का भी साधन है। हम सिनेमा द्वारा देश-विदेश के लोगों का जीवन, उनके अनुभव, वहाँ की घटनाएँ आदि जान सकते हैं। ऐतिहासिक स्थानों का दर्शन भी सिनेमा द्वारा होता है। हर व्यक्ति विभिन्न देशों की सैर नहीं कर सकता। सिनेमा द्वारा वह दूसरे देशों की सैर कर सकता है।

Cinema के कारण आज हजारों लोगों को काम मिल रहा है। बम्बई में सिनेमा उद्योग उन्नति के शिखर पर पहुँच गया है। संसार के कई देशों में भारत के चलचित्र बड़े चाव से देखे जाते हैं, निर्माता-निर्देशक, अभिनेताओं और अभिनेत्रियों को सम्मान प्रदान किया जाता है।

सामाजिक बुराइयों को दूर करने का सिनेमा एक उत्तम साधन है। लोगों को शिक्षित करने तथा उन्हें दहेज जैसी अनेक कुप्रथाओं से होने वाली हानियों का ज्ञान कराने के लिए सिनेमा से बढ़कर अन्य दूसरा कोई साधन नहीं है।

सिनेमा से अनेक हानियाँ भी है। आजकल लोग सिनेमा के अधिक शौकीन हो गए हैं। विद्यार्थी भी पढ़ने के स्थान पर अपना अधिक समय सिनेमा देखने में नष्ट कर डालते हैं। आँखों पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। सिनेमा हाल में एक साथ एक हजार से अधिक लोग तीन घण्टे बैठकर चलचित्र देखते हैं। उनके स्वास्थ्य पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है।

सिनेमा में बुराइयों को अधिक उभार कर दिखाया जाता है। नादान बालक बुराइयों की ओर जल्दी आकर्षित होते हैं। यही कारण है कि इससे बच्चों में अनेक बुराइयाँ आती जा रही हैं। फैशन का बोलबाला है कई बच्चे घर छोड़कर भाग जाते हैं।

सिनेमा में चोरियाँ और डकैतियाँ दिखाई जाती हैं। चोर और डाकू नए-नए तरीके सीख कर बैंक लूटते हैं और चोरियाँ करते हैं। इससे देश को बहुत हानि होती है।

सिनेमा में अनेक आपत्तिजनक गंदे दृश्य दिखाए जाते हैं। इनका बच्चों और बड़ों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। कई चित्र ऐसे दिखाए जाते हैं जो माता-पिता अपने बच्चों के साथ बैठकर नहीं देख सकते।

हमें ऐसे चलचित्र देखने चाहिएँ जो लोगों के मनोरंजन के साथ-साथ ज्ञान की वृद्धि करें। निर्माताओं और निर्देशकों को लोगों की नैतिक उन्नति के लिए अच्छे चलचित्र बनाने चाहिएँ। सेंसर बोर्ड को इस ओर विशेष ध्यान देना चाहिए।


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