1 Best Essay on Health and Hygiene | स्वच्छता और स्वास्थ्य पर निबंध

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Essay on Health and Hygiene | स्वच्छता और स्वास्थ्य पर निबंध

कहते हैं, जहाँ सफाई रहती है वहां भगवान रहता हैं सफाई से हम अपने वातावरण को सुन्दर बना सकते हैं परन्तु गन्दगी से बदसूरती बदबू, असुन्दरता तो बढ़ती ही है, तरह-तरह की महामारियां भी फैलती हैं। हमारा वातावरण दूषित होता है।

मनुष्य शुरू से ही जिज्ञासु प्रवृति का रहा है। उसकी विकसित बुद्धि नित नए आविष्कार करने हेतु प्रेरित करती रही है। जैसे-जैसे मनुष्य ने वैज्ञानिक उन्नति की, उसने अपने भौतिक सुख की प्राप्ति के लिए अनेक कल-कारखानों और उद्योगों का विकास कर लिया। ये सब एक ओर तो देश को विकास प्रदान करते हैं, दूसरी ओर जन-स्वास्थ्य में गिरावट ला रहे है।

इन कारखानों से बाहर निकलता जल-मल, धुआँ आदि हमारे वातावरण को दूषित करता जा रहा है जिससे अनेक तरह के रोग फैलते हैं। इस प्रकार मनुष्य अनेक शारीरिक और मानसिक रोगों का शिकार होता जा रहा है। बढ़ती हुई जनसंख्या गन्दगी का सबसे अहम कारण है। आबादी बढ़ती जा रही है, रहने के लिए जगह कम होती जा रही है, जंगल-पर-जंगल कटते जा रहे हैं। थोड़ी-सी जगह में ऊंचे-ऊंचे फ्लैट खड़े हो रहे हैं।

छोटे-छोटे घर जिनमें न हवा आती है, न धूप। हर जगह सीलन, सँकरी गलियां, गन्दगी, कूड़े-करकट का ढेर, यही सब दिखाई पड़ता है। ये सब हमारे स्वास्थ्य के हानिकारक हैं।

इसके विपरीत अगर सफाई रखें तो सब-कुछ साफ-सुथरा, अच्छा और सुन्दर लगेगा। सुन्दर होने से हर चीज पर फर्क पड़ेगा। हमारा तन और मन दोनों स्वस्थ रहेंगे। हम अपने को प्रसन्न और स्फूर्तिमय पाएँगे और हर काम में मन लगेगा तथा जब काम मन लगाकर होगा तो स्वाभाविक है कि हमें उसमें सफलता भी मिलेगी।

शरीर की सफाई और स्वास्थ्य

हम अपने शरीर को साफ कैसे रखें। इसके लिए हमें रोज सवेरे जल्दी उठना चाहिए। सवेरे की हवा अमृत के समान शीतल और लाभ पहुँचानेवाली होती है। सुबह जल्दी उठने से ताजगी बनी रहती है और हमारे अन्दर स्फूर्ति भरी रहती है। उठने के बाद अच्छी तरह मुँह को साफ करने के बाद बिना कुछ खाएँ हुए एक गिलास ठण्डा पानी पीना चाहिए।

इससे सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि शौच ठीक से होता है और पेट साफ रहता हैं। पेट साफ रहने से भूख भी खुलकर लगती है और जो कुछ भी हम खाते हैं वह आसानी से पच जाता है। शौच आदि के बाद तथा खाने के पहले और बाद में हमें हाथों को हमेशा साबुन से अच्छी तरह धोना चाहिए।

अक्सर गन्दे हाथों से खाने-पीने से बीमारियाँ फैलती हैं। हमारे हाथों में बीमारियों के कीटाणु होते हैं जो हमें दिखाई नहीं देते और खाते-पीते वक्त ये हमारे अन्दर चले जाते हैं और बीमारियों को जन्म देते हैं। इसलिए हाथों को हमेशा अच्छी तरह, खूब रगड़कर साबुन से धोना चाहिए।

दाँतों की सफाई पर भी हमें पूरा ध्यान देना चाहिए। दाँत साफ रहेंगे तो वे मजबूत रहेंगे। दाँतो को साफ और मजबूत बनाने के लिए हमें रोज सुबह और रात को सोने से पहले दातुन अथवा मंजन करना चाहिए। दाँत साफ रहेंगे तो मुहँ में से बदबू नहीं आएगी और कीटाणु भी पैदा नहीं होंगे।

इसके अलावा हमें रोज नहाना चाहिए-चाहे सर्दी हो या गर्मी। रोज नहाने से हर प्रकार की गन्दगी दूर रहेगी। हमारे शरीर से धूल, मैल, पसीने की बदबू दूर रहेगी और हम साफ और स्वस्थ रहेंगे जिससे हम दिन-भर तरो-ताजा महसूस करेंगे और बीमारियाँ हमसे दूर रहेंगी तथा हम स्वस्थ रहेंगे।

नहाने के बाद बारी आती है साफ और स्वस्थ कपड़ों की। हमेशा नहाने के बाद हमें धुले हुए और साफ-सुथरे कपड़े पहनने चाहिए। पहनने के कपड़े ही नहीं हमारे आसपास में, घर में बिछाने-ओढ़ने के कपड़े, तौलिए, परदे आदि का भी साफ होना आवश्यक हैं हमें अपने घरों को भी साफ-सुथरा रखना चाहिए।

घरों को हमेशा दूर-दूर और खुले होना चाहिए। उनमें रोशनदान तथा खिड़कियाँ होनी चाहिए ताकि धूप-स्वच्छ हवा अन्दर आ सके। अक्सर बढ़ती हुई आबादी के कारण छोटी-छोटी जगहों पर बहुत-बहुत लोग रहते हैं। ऐसा नहीं होने देना चाहिए।

बड़े-बड़े महानगरों में लोग झुग्गी-झोपड़ियां डालकर रहने लगते हैं। अपने घरों का कूड़ा-करकट सभी वहीं फेंकते रहते हैं, न नालियां होती हैं और न ही शौचालय। जगह-जगह घरों का पानी बहता रहता हैं जिसकी वजह से कीचड़ रहती हैं शौचालयों की व्यवस्था न होने की वजह से ये लोग अपने घरों के आसपास ही शौच करते रहते हैं।

सब तरफ गन्दगी फैली रहती है। इस गन्दगी, कूड़ा-करकट, कीचड़, इन सबसे मच्छर पैदा होते हैं। और इन मच्छरों से डेंगू, मलेरिया आदि भयानक बीमारियाँ फैलती हैं और भी कई तरह की बीमारियों का जन्म होता हैं इसलिए हमें कोशिश करना चाहिए कि इन तरह की स्थिति उत्पन्न ही न हो।

इसके लिए एक जगह पर इतने सारे लोगों को इकट्ठा न होने दें। जहाँ लोगों की रिहायशी हो वहाँ पर कूड़ेदान, शौचालयों आदि की व्यवस्था हो। कहीं भी पानी जमा न होने दें।

गाँवो की सफाई

अक्सर गाँवों में लोग कुँओं, तालाबों अथवा तलैयों में नहाते हैं, कपड़े आदि भी धोते हैं। जानवरों को भी वहीं पर नहलाते हैं और पीने का पानी भी वहीं से भरते है। नहाने, धाने के लिए अलग और जानवरों के लिए अलग तथा पीने के लिए अलग पानी होना चाहिए। उनके आसपास गन्दगी, कीचड़ नहीं होनी चाहिए ताकि मच्छर, मक्खी न फैलें, क्योंकि ये अनेक बीमारियों की जड़ है।

गाँवों में हर घर में गाय, भैंस आदि पशु पाले जाते हैं। ये पशु कहीं भी मल त्याग देते हैं। अगर इनकी साफ-सफाई न हो तो इन पशओं में कीडे भी पड़ जाते हैं। ये हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं। हमें इन पशुओं को साफ रखना चाहिए तथा इनके रहने की जगह में भी सफाई रखनी चाहिए।

अपने घरों के आसपास के अलावा हमें अपने गली, मोहल्लों, गाँवों और शहरों की सफाई की तरफ भी ध्यान देना चाहिए। अक्सर लोग राह चलते कहीं भी थूक देते हैं। कूड़ा फेंक देते हैं, कहीं भी पेशाब कर देते हैं, जिसकी वजह से सड़कों, गलियों यहाँ तक कि बसों, रेलगाड़ियों आदि में भी गन्दगी फैलती है।

यह सब न तो देखने में ही अच्छा लगता है, बल्कि कई प्रकार के कीटाणुओं को जन्म देकर बीमारियाँ फैलाते है। हमें इन सब पर रोक लगानी चाहिए। साफ-सुथरी सड़कें भला किसे अच्छी नहीं लगती। बाहर के देशों में देखें तो हमें कहीं भी इतनी गन्दगी नहीं मिलेगी जितनी गन्दगी हमारे देश में हैं। हमें बाहर के देशों से उदाहरण लेना चाहिए।

अपने तन और आसपास की गन्दगी साफ रखने के आलावा अपने को भी साफ रखना चाहिए। ये भी एक तरह की सफाई हैं मन को साफ रखने से मतलब अपने व्यवहार को अच्छा और सरल रखना है। अपने मन में किसी के लिए बुरा न सोचना, किसी के लिए भी बैर न रखना, किसी से भी घृणा न करना, किसी से झूठ न बोलना, ये सब हमारे मन की सफाई है।

जब हम सबसे सच बोलेंगे, एक-दूसरे की मदद करेंगे, अपना काम सच्ची लगन और ईमानदारी से करेंगे, किसी का भी बुरा नहीं चाहेंगे तो स्वाभाविक है कि हम अपने मन की इस सफाई से अपने देश को स्वस्थ रखेंगे और उसे उन्नति के रास्ते पर ले जाएँगे। अगर सफाई नहीं होगी तो हम स्वस्थ नहीं होंगे।

जब हम स्वस्थ नहीं होंगे तो हम अपना कार्य ठीक प्रकार से नहीं कर पाएँगे और जब कोई भी कार्य ठीक प्रकार से नहीं होगा तो हमारे देश की उन्नति भी सम्भव नहीं होगी। इसलिए आवश्यक है कि हर तरफ सफाई हो क्योंकि, सफाई से स्वास्थ्य है, स्वस्थ मनुष्य से ही स्वस्थ समाज है, और एक स्वस्थ समाज ही स्वस्थ राष्ट्र का सृजन कर सकता है।

हमारी सरकार इस ओर काफी ध्यान दे रही है। जगह-जगह सड़कों के किनारे, बस स्टैण्डों पर , गली, मौहल्ले में कूड़ेदान की व्यवस्था की जा रही है। जहाँ से कचरा-गाड़ी समय-समय पर कूड़ा उठाकर ले जाती हैं नालियों की रोज सफाई होती हैं उनमें दवाइयाँ आदि का छिड़काव समय-समय पर होता रहता है।

गलियों में, सड़कों पर झाडू लगाने के लिए सफाई कर्मचारी रखे गए हैं जो रोज झाडू लगाते हैं। कूड़ा-कचरा एक जगह पर इकट्ठा कर देते हैं जिसे कूड़ा-गाड़ी उठाकर ले जाती है। जगह-जगह पर शौचालयों की व्यवस्था की जा रही हैं कई सफाई अभियान भी चलाए जा रहे हैं। विज्ञापनों के द्वारा लागों को भी गन्दगी से होनेवाले फायदों के बारे में जानकारी दी जा रही है। परन्तु ये सब काफी नहीं है। सरकार को चाहिए कि सफाई के लिए नियम, कायदे-कानून बनाए। जो भी गन्दगी फैलाए उसपर जुर्माना करे।

सफाई न रखने पर अथवा साफ जगह को गन्दा करने वालों को दण्ड दे और ध्यान रखे कि इन कायदे-कानूनों का कड़ाई से पालन हो।

सफाई की जिम्मेदारी सिर्फ हमारी सरकार की ही नहीं है अपितु हम लोगों की भी हैं हम लोगों को इसके बारे में जागरूक होना चाहिए। जन-जन को सफाई के बारे में जानकारी दी जानी चाहिए। जब तक प्रत्येक व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेगा तब तक हम इस समस्या को दूर नहीं कर सकते। हर बात के लिए सरकार को दोषी न ठहराएँ बल्कि स्वयं इसे अपना काम समझकर करें।

अपने घरों की तरह अपने नगरों, गाँवों और शहरों को साफ रखना हमारा कर्तव्य हैं जब हम हर तरफ सफाई का विशेष ध्यान रखेंगे, तभी हर तरफ सुन्दरता होगी, सभी स्वस्थ होंगे और तभी हम एक स्वस्थ, प्रगतिशील राष्ट्र का निर्माण कर सकेंगे।


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