3 Best Independence Day Essay in Hindi | स्वतंत्रता दिवस Swatantrata Diwas Par Nibandh

Independence Day in Hindi

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10 Lines Essay on Independance Day in Hindi | Short Essay on Independence Day in Hindi

  1. वर्ष में कुछ तिथियां महत्वपूर्ण होती है।
  2. 15 अगस्त भी ऐसे ही एक महत्वपूर्ण तिथि है।
  3. भारतीय इतिहास में यह स्वर्ण अक्षरों में लिख जाने वाला दिन है।
  4. 1947 ईस्वी की स्थिति कोर्स भारत स्वतंत्र हुआ।
  5. भारत एक गुलाम देश था इस पर अंग्रेज शासन करते थे किंतु एक लंबे संघर्ष के बाद यह स्वतंत्र हुआ।
  6. इसलिए हम लोग प्रतिवर्ष 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं।
  7. यह संपूर्ण देश में मनाया जाता है इस दिन लोग एक स्थान पर एकत्र होते हैं।
  8. राष्ट्रीय झंडा फहराया जाता है राष्ट्रीय गीत गाया जाता है सैनिक और एनसीसी परेड का व्यवहार होता है विभिन्न स्थानों पर सभाएं की जाती है।
  9. नेताओं के भाषण होते हैं मिठाइयां बांटी जाती है सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है।
  10. इस प्रकार इस दिन हम लोग खुश रहते हैं।

स्वतंत्रता दिवस पर निबंध | Essay on Independence Day in Hindi (250 Words)

स्वतंत्रता दिवस हमारा राष्ट्रीय त्योहार है। कई वर्षों की गुलामी के बाद हमारा देश भारत 1947 को आजाद हुआ था। इसी दिन हमारे देश के वीरों ने देश को स्वतंत्र कराया था. तभी अगस्त को प्रतिवर्ष स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाते हैं।

इस दिन देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने लालकिले पर तिरंगा फहराया और राष्ट्र के नाम संदेश दिया। उस दिन हर्ष से भरे लाखों भारतीय लालकिले पर जमा थे। असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों के अथक प्रयासों के बाद मिली इस स्वतंत्रता से जन-जन अत्यंत प्रसन्न था। 15 अगस्त का सबसे बड़ा आयोजन दिल्ली में होता है। हमारे देश के प्रधानमंत्री लालकिले पर झंडा फहराते हैं तथा देश के नाम संदेश प्रसारित करते हैं। आज भी यही परंपरा चली आ रही है। पूरे देश में इस त्योहार की धूमधाम रहती है। इस दिन स्कूलों, कॉलेजों तथा सभी दफ़तरों में अवकाश रहता है।

प्रात:काल बच्चे प्रभातफेरी निकालते हैं तथा देशभक्ति के गीतों एवं नारों के साथ गली-गली, नगर-नगर घूमते हैं। बाद में निर्धारित समय पर सभी जगह ध्वजारोहण होता है। इस दिन स्कूलों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। बच्चे देशभक्ति के गीत गाते हैं। बाद में मिठाइयाँ भी बाँटी जाती हैं। शाम के समय लालकिले तथा अन्य स्थानों पर कवि-सम्मेलनों तथा मुशायरों का आयोजन किया जाता है। इंडिया गेट, संसद भवन, राष्ट्रपति भवन आदि विशेष इमारतों पर रोशनी की जाती है।

इस प्रकार स्वतंत्रता दिवस अत्यंत श्रद्धा और देशभक्ति की भावना से देशभर में मनाया जाता है। इस दिन प्रत्येक भारतवासी अपने देश की एकता व अखंडता बनाए रखने का प्रण लेता है।


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स्वतंत्रता का स्वरूप (स्वतंत्रता दिवस )

स्वतंत्रता का अर्थ

स्वतंत्र शब्द दो शब्दों के योग से बना है- ‘स्व’ और ‘तंत्र’। ‘स्व’ का अथ ह- स्वय एव तत्र का अर्थ है- शासन। अतः हम कह सकते हैं कि स्वतंत्रता किसी व्यवस्था के अंतर्गत वह स्थिति है जिसमें हम अपने सभी कार्य किसी नियम व प्रणाली व्यवस्था के अनुसार करते हैं। हमारा देश 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हुआ। उस समय भारत वर्ष के लोगों को ऐसा लगा कि अब हम पूरी तरह से स्वतंत्र हो चुके हैं।

ऐसी स्थिति में भारतीय शासन सत्ता को चलाने एवं देश की सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक एवं राष्ट्रीय प्रगति के लिए संविधान का निर्माण किया गया। इस संविधान के माध्यम से सभी के उत्थान के लिए अधिकारों की व्यवस्था की गई। इसके पीछे जिस लोकतांत्रिक व्यवस्था की स्थापना की गई उसका मूल उद्देश्य था- बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय। इसके लिए भारत सतत प्रयत्नशील है।

स्वतंत्रता और स्वच्छंदता में अंतर

स्वतंत्रता एवं स्वछंदता में मौलिक अंतर है। ‘स्वच्छंदता’ शब्द संस्कृत के शब्द ‘छंदस्’ से बना है। इसका अर्थ होता है- इच्छा, कामना, उद्देश्य। जब व्यक्ति यह समझने लगता है कि वह स्वतंत्र नागरिक है कुछ भी कर या बोल सकता है तो वह भूल जाता है कि वह स्वतंत्रता नहीं बल्कि स्वच्छंदता की बात कर रहा होता है। स्वच्छंद प्रवृत्ति का व्यक्ति स्वतंत्रता की आड़ में वही कार्य करता है जिससे उसका व्यक्तिगत हित होता है।

हमारा दायित्व

इस तरह की सोच रखने वाले राष्ट्रीय एकता व अखंडता की चिंता नहीं करते। देश के संविधान में वर्णित नियमों की उपेक्षा करने वाले ही प्रायः ऐसे शब्दों का प्रयोग करते हैं। जब हमारी युवा पीढ़ी कहती है कि हम स्वतंत्र हैं जो चाहे बोल सकते हैं तो इसका अर्थ यह है कि वे संविधान का सम्मान नहीं करते अपितु वे व्यक्तिगत स्वार्थ की भावना से प्रेरित होते हैं।

निष्कर्ष

स्वतंत्रता के संदर्भ में हमारा दायित्व है कि हमारे द्वारा किया जाने वाला हर कार्य एवं हमारे द्वारा बोले जाने वाले हर शब्द संवैधानिक मर्यादा एवं नैतिकता का हनन न करते हों। ऐसा करने से न केवल सामाजिक समरसता का विकास होगा बल्कि राष्ट्रीय एकता व अखंडता को भी बल मिलेगा। स्वतंत्रता का वास्तविक राष्ट्रीय स्वरूप आत्मसात करने से सकारात्मक चिंतन शक्ति का विकास होगा एवं हमारे लोकतंत्र की नींव को और भी मज़बूती मिलेगी।


स्वतन्त्रता दिवस पर निबंध | Swatantrata Diwas Par Nibandh

हर वर्ष 15 अगस्त को स्वतन्त्रता दिवस धम-धाम से मनाया जाता है। 15 अगस्त, 1947 का हमारा दश वर्षों की पराधीनता के बाद स्वतंत्र हआ। यह एक राष्ट्रीय पर्व है। इस दिन पूरे भारत में छुट्टी होती है। भारत के सब प्रान्तों में यह त्योहार समान उत्साह-उल्लास से मनाया जाता है।

15 अगस्त, 1947 का दिन भारतीय इतिहास का सबसे गौरवशाली दिन है। स्वतन्त्रता की चिनगारी सन् 1857 में सुलगी थी। बाद में गाँधी जी, नेहरू, पटेल, सुभाष चन्द्र बोस और भगतसिंह जैसे वीरों ने इस चिंगारी को शोला बना दिया। अंग्रेजों के अत्याचारों ने अग्नि में घी का काम किया। ‘असहयोग आन्दोलन’ और ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलनों ने अंग्रेजी शासन की जड़ें हिला दी। जेलें देशभक्तों से भर गई। बच्चा-बच्चा देश की आज़ादी के गीत गाने लगा। अनेक देश-भक्त हँसते-हँसते स्वतन्त्रता की बलिवेदी पर शहीद हुए। अन्त में 15 अगस्त, 1947 को देश आजाद हुआ। इसी कारण भारतीय जनता प्रतिवर्ष 15 अगस्त को बड़ी धूम-धाम से मनाती है।

15 अगस्त भारत के प्रत्येक कोने में मनाया जाता है। प्रभात-फेरियाँ होती हैं। स्कूल, कॉलिज, दफ्तर और बाजार इस दिन बन्द होते हैं। राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है। राष्ट्रगान गाया जाता है। स्वतन्त्रता दिवस के दिन पर्व संध्या को राष्ट्रपति का राष्ट्र के नाम संदेश प्रसारित किया जाता है। बच्चे तिरंगी पतंगें उड़ाते हैं। राष्ट्र के नेता स्वतन्त्रता के महत्त्व पर बोलते हुए राष्ट्र-निर्माण के लिए राष्ट्र का आह्वान करते हैं। भारत माता की जय’ और ‘महात्मा गाँधी की जय’ के नारों से आकाश गूंज उठता है।

भारत की राजधानी दिल्ली में यह त्योहार विशेष हर्षोल्लास से मनाया जाता है। प्रात:काल ही लाल किले के सामने वाला मैदान दर्शकों से खचाखच भर जाता है। हिन्दू, मुसलमान, सिक्ख और ईसाई सब मिलकर इस पर्व को मनाते हैं। भारत के प्रधानमंत्री झंडा फहराते हैं। वे राष्ट्र के अतीत और वर्तमान पर प्रकाश डालते हुए भविष्य की योजनाओं के बारे में लोगों को जानकारी देते हैं। प्रधानमंत्री का सन्देश रेडियो और दूरदर्शन द्वारा भारत के भिन्न-भिन्न कोनों में गूंज उठता है। उस दिन देश की रक्षा की शपथ ली जाती है। अन्त में राष्ट्रगान गाया जाता है। रात को आतिशबाजी और पटाखे छोड़कर जन-उल्लास प्रकट किया जाता है। कवि दरबार और संगीत का कार्यक्रम आयोजित किया जाता है।

यह दिन हमें उन वीरों की याद दिलाता है जिन्होंने देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। हमें जानना चाहिए कि आजादी बहुमूल्य बलिदान देकर प्राप्त हुई। इस आजादी की रक्षा करना प्रत्येक भारतवासी का परम-धर्म है। अतः हमें यह प्रतिज्ञा करनी चाहिए कि हम अपने देश की रक्षा के लिए अपना तन, मन और धन लगा देंगे।


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