5 Best Essay on Mahatma Gandhi in Hindi | महात्मा गाँधी पर निबंध

हैल्लो दोस्तों कैसे है आप सब आपका बहुत स्वागत है इस ब्लॉग पर। हमने इस आर्टिकल में Essay on Mahatma Gandhi in Hindi | महात्मा गाँधी पर 1 निबंध लिखे है जो कक्षा 5 से लेकर Higher Level के बच्चो के लिए लाभदायी होगा। आप इस ब्लॉग पर लिखे गए Essay को अपने Exams या परीक्षा में लिख सकते हैं

क्या आप खुद से अच्छा निबंध लिखना चाहते है या अच्छा निबंध पढ़ना चाहते है तो – Essay Writing in Hindi


10 lines on Gandhi Ji in Hindi

  1. Mahatma Gandhi एक महान व्यक्ति थे, बापू के नाम से जाने जाते थे।
  2. उन्हें राष्ट्रपिता भी कहा जाता है।
  3. उनके परिश्रम के कारण ही भारत स्वतंत्र हुआ।
  4. महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 ईस्वी को पोरबंदर में हुआ।
  5. उनके पिता करम चंद्र गांधी राजकोट के दीवान थे।
  6. उनकी माता का नाम पुतलीबाई था।
  7. मैट्रिक पास करने के बाद वह इंग्लैंड गए। वह बैरिस्टर बनकर भारत लौटे।
  8. एक मुकदमे में बहस करने के लिए वह दक्षिण अफ्रीका गए। वहां के भारतीयों को उनके जमीदारों से मुक्ति दिलाई इसके लिए उन्होंने सत्याग्रह शुरू किया।
  9. वे भारत लौटे और आजादी के लिए संघर्ष करने लगे।
  10. अंततः उन्हें सफलता मिली, भारत स्वतंत्र हुआ। हमलोगो गांधीजी की राहों पर चलना चाहिए।

Short essay on Mahatma Gandhi in Hindi (120 words)

मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म गुजरात के पोरबंदर नाम के जगह पर 2 अक्टूबर सन 1869 ईस्वी में हुआ था। उनके पिता जी राजकोट के वजीर थे। उनकी उच्च शिक्षा इंग्लैंड में हुई। गांधीजी इंग्लैंड से बैरिस्टर बनकर लौटे। गांधीजी ने दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों के अधिकार के लिए संघर्ष किया। वे हमेशा हिंदू मुस्लिम एकता को पछधर रहे तथा इसके लिए आजीवन प्रयत्न करते रहे।

उन्होंने गरीबी हटाने तथा छुआछूत को दूर करने के लिए सदा प्रयत्न किया। वे स्वतंत्रता आंदोलन में सम्मिलित हुए तथा कई बार जेल भी गए। गांधी जी के नेतृत्व में ही भारत को ब्रिटिश शासकों से स्वतंत्रता प्राप्त हुई। सत्य और अहिंसा गांधीजी के दो हथियार थे। गांधी जी की मृत्यु नाथूराम गोडसे के गोली मरने से 30 जनवरी सन 1948 को हुई। गांधी जी को राष्ट्रपिता कहते हैं।


Essay on Mahatma Gandhi in Hindi (350 words)

मेरा प्रिय नेता (राष्ट्रपिता महात्मा गांधी) जब-जब पृथ्वी पर पाप और अत्याचार बढ़ जाता है, तब महान् विभूतियाँ अवतरित होकर संसार को कष्टों से मुक्ति दिलाती हैं। वर्षों की पराधीनता के कारण भारत देश की दुर्दशा हो रही थी। अंग्रेजों की दमन नीति के कारण भारत में पाप और अत्याचार बढ़ गया। ऐसे समय में सत्य और अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी का आविर्भाव हुआ। उन्होंने एकता और स्वाधीनता का सन्देश देकर लोगों में अग्नि प्रज्वलित करदी तथा कुछ ही दिन में अंग्रेजी राज्य की जड़ें हिला दी। लोग उन्हें बापू एवं राष्ट्रपिता कह कर पुकारते थे।

Mahatma Gandhi का पूरा नाम मोहनदास कर्मचन्द गांधी था। इनका जन्म 2 अक्तूबर, 1869 ई० को पोरबन्दर में हुआ। इनकी माता का नाम पुतली बाई था। माता की धार्मिक भावनाओं का गांधी जी पर बहुत प्रभाव पड़ा। इनके पिता करमचन्द गांधी पोरबन्दर रियासत के दीवान थे। मोहनदास का विवाह तेरह वर्ष की अवस्था में कस्तूरबा से हो गया। अठारह वर्ष की अवस्था में मैट्रिक पास करके गांधी जी ने भावनगर के श्यामल कालेज में प्रवेश किया। फिर बैरिस्टरी पढ़ने के लिए ये इंग्लैंड चले गए।

1891 में गांधी जी बैरिस्टरी पास करके बम्बई में वकालत करने लगे। 1892 में एक व्यापारी के मुकदमे के सिलसिले में अफ्रीका गए। वहाँ मुकदमा जीतने के बाद गोरों द्वारा कालों के प्रति किए जाने वाले दुर्व्यवहार का उन्होंने विरोध किया। इसके पश्चात् उन्होंने वहाँ नेशनल इंडियन कांग्रेस की स्थापना की।

भारत लौटकर गांधी जी ने भारत के लोगों की दुर्दशा को देखा। अंग्रेजों को इस दुर्दशा का मुख्य कारण जानकार उन्होंने भारत को स्वतंत्र कराने का संकल्प लिया। उन्होंने सत्याग्रह और असहयोग आंदोलन चलाकर अंग्रेजी राज्य की जड़ें हिला दीं। जेलें भर गईं। अंग्रेजी सरकार को झुकना पड़ा। 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ। भारत के प्रथम प्रधानमन्त्री श्री जवाहरलाल नेहरू बने।

अंग्रेज़ों ने हमें आजादी तो दे-दी, किन्तु भारत और पाकिस्तान के रूप में भारत का विभाजन कर दिया गया। इस समय भारत और पाकिस्तान में लाखों लोग बेघर हो गए हज़ारों बच्चे अनाथ हो गए तथा हज़ारों स्त्रियों के सुहाग उजड़ गए। उस समय गांधी जी ने दुखी मानवता को प्रेम और एकता का सन्देश दिया। उन्होंने अछूतों के उद्धार के लिए और ग्रामों में सुधार लाने के लिए भरसक प्रयत्न किए। उन्होंने राम और रहीम को एक मानकर भारत में राम-राज्य स्थापित करने का स्वप्न देखा।

दुर्भाग्य से 30 जनवरी, 1948 को नाथूराम गोडसे की गोली से गांधी जी ‘हे राम’! कहते हुए चिरनिद्रा में सो गये। राजघाट पर उनकी समाधि बनाई गई।

गांधी जी आज हमारे मध्य नहीं हैं ; परन्तु उनके आदर्श आज भी हमारा मार्ग-दर्शन कर रहे हैं। उन्होंने अपना जीवन देश की स्वतन्त्रता, अछूतोद्धार, ग्राम सुधार और हिन्दू-मुस्लिम एकता में लगा दिया। हमें अपना जीवन उनक अपूर काम को पूरा करने में लगाना चाहिए। यही हमारी उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।


महात्मा गाँधी पर निबंध (400 Words)

परिचय

Mahatma Gandhi भारतीय अंतरिक्ष में ही नहीं, विश्व व्योम में चमकनेवाले एक ऐसे सूर्य हैं, जिनकी चमक से सम्पूर्ण विश्व अनंतकाल तक चकाचौंध रहेगा। सत्य, अहिंसा और परोपकार की जो ज्योति इन्होंने जलाई, उनकी किरणों में ही सम्पूर्ण मानवता का कल्याण छिपा है। राष्ट्र की प्रत्येक संतान को इन्होंने पिता की दृष्टि से देखा, फलतः ये राष्ट्रपिता और बापू कहलाए।

प्रारम्भिक जीवन

इनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गाँधी था। इनका जन्म गुजरात राज्य के राजकोट जिले के पोरबंदर नामक ग्राम में 2 अक्तूबर 1869 को हुआ था। इनके पिता करमचंद गाँधी राजकोट रियासत के दीवान थे और माता पुतलीबाई धार्मिक संस्कारों से पूर्ण एक कुशल गृहिणी थीं। इनकी प्रारंभिक शिक्षा गाँव में हुई। 13 वर्ष की अल्पायु में ही इनकी शादी कस्तूरबा बाई से हुई। 1887 ई. में इन्होंने इंट्रेस की परीक्षा पास की। इनके भाई लक्ष्मीदास इन्हें वकालत के पेशे से जोड़ना चाहते थे। अतः इसकी पढ़ाई के लिए इन्हें विलायत जाना पड़ा। बारिस्टरी की परीक्षा पास करने के बाद 1891 ई. में ये विलायत से भारत लौटे और मुम्बई उच्च न्यायालय में वकालत करने लगे।

राजनीतिक जीवन

1893 ई. में एक मुकदमे के सिलसले में इन्हें दक्षिण अफ्रीका जाना पड़ा। वहाँ भारतीय मूल के लोगों पर अँगरेजों का असहनीय अत्याचार चल रहा था। गाँधीजी यह सब देखकर द्रवित हो उठे। इन्होंने सत्य-अहिंसा को आधार बनाकर शोषण के विरुद्ध सशक्त आवाज बुलंद की। फलतः भारतीयों पर ढाए जानेवाले जुल्मों और अत्याचारों में कुछ कमी आई।

महत्ता

ये 1914 ई. में स्वदेश लौटे। यहाँ भी अँगरेजों का वही दमनचक्र चल रहा था। फलतः इन्हें राजनीति में कूदना पड़ा। चाहे चम्पारण में किसान के शोषण का सवाल हो या अहमदाबाद में मिल-मजदूरों की समस्या, हर जगह इन्होंने सफलता पाई। लेकिन, 1919 ई. में जालियाँवाला बाग कांड ने इनके हृदय को विदीर्ण कर दिया। फलतः इन्होंने ‘असहयोग आंदोलन’ का शंखनाद किया। बाद में 1930 ई. में ‘नमक आंदोलन’ की अगुआई की। लोग अँगरेजों से ऊब चुके थे, अतः इन्होंने 1942 ई. में ‘अँगरेजो, भारत छोड़ो’ का नारा बुलंद किया। अंततः हारकर अँगरेजों को भारत छोड़ना पड़ा और भारत 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ।

उपसंहार

बुरा मत बोलो, बुरा मत सुनो, बुरा मत देखो’ के सिद्धांत पर चलनेवाला सत्य, अहिंसा और शांति का यह पुजारी भी हिंसा का शिकार हो गया। नाथूराम गोडसे ने 30 जनवरी 1948 को इनकी हत्या कर दी। लेकिन, यह महामानव आज मरकर भी अमर है। हमें इनके द्वारा बतलाए मार्गों पर चलना चाहिए। यही इनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।


महात्मा गाँधी पर निबंध (450 + Words)

राष्ट्र पर जब जब संकट का कालमेघ छाता है, तब प्रभु स्वयं या अपने प्रधान प्रतिनिधि को राष्ट्र रक्षा के लिए भेजते है। हमारा देश भी जब अंग्रेजों के अत्याचार से कराह रहा थी, जब भारतमाता स्वतंत्रता देवी के रूप में परतंत्रता के कारागार में बंदी थी। तब उन्हें मुक्त करने के लिए मोहन ने मोहनदास के रूप में अवतार ग्रहण किया।

Mahatma Gandhi भारतीय अंतरिक्ष में ही नहीं, विश्व व्योम में चमकनेवाले एक ऐसे सूर्य हैं, जिनकी चमक से संपूर्ण विश्व अनंत काल तक चकाचौंध रहेगा। सत्य, अहिंसा और परोपकार की जो ज्योति इन्होंने जलाई, उनकी किरणों में ही संपूर्ण मानवता का कल्याण छिपा है। राष्ट्र की प्रत्येक संतान को इन्होंने पिता की दृष्टि से देखा, फलतः ये राष्ट्रपिता और बापू कहलाए।

इनका पूरा नाम मोहन दास करमचंद्र गाँधी था। इनका जन्म गुजरात राज्य के राजकोट जिले के पोरबंदर नामक ग्राम में 2 अक्तूबर 1869 को हुआ था। इनके पिता करमचंद गाँधी राजकोट रियायत के दीवान थे और माता पुतलीबाई धार्मिक संस्कारों से पूर्ण एक कुशल गृहिणी थीं। इनकी प्रारंभिक शिक्षा गाँव में हुई।

13 वर्ष की अल्पायु में ही इनकी शादी कस्तूरबा बाई से हुई। 1887 ई. में इन्होंने इंट्रेंस की परीक्षा पास की। इनके भाई लक्ष्मीदास इन्हें वकालत के पेशे से जोड़ना चाहते थे। अतः इसकी पढ़ाई के लिए इन्हें विलायत जाना पड़ा। बारिस्टरी की परीक्षा पास करने के बाद 1891 ई. में ये विलायत से भारत लौटे और मुम्बई उच्च न्यायालय में वकालत करने लगे।

1893 ई. में एक मुकदमे के सिलसिले में इन्हें दक्षिण अफ्रीका जाना पड़ा। वहाँ भारतीय मूल के लोगों पर अँग्रेजों का असहनीय अत्याचार चल रहा था। गाँधीजी यह सब देखकर द्रवित हो उठे। इन्होंने सत्य-अहिंसा को आधार बनाकर शोषण के विरुद्ध सशक्त आवाज़ बुलंद की। फलतः भारतीयों पर ढाए जानेवाले जुल्मों और अत्याचारों में कुछ कमी आई। ये 1914 ई. में स्वदेश लौटे। यहाँ भी अँग्रेजों का वही दमन चक्र चल रहा था।

फलतः इन्हें राजनीति में कूद ना पड़ा। चाहे चंपारण में किसान के शोषण का सवाल हो या अहमदाबाद में मिल-मज़दूरों की समस्या, हर जगह इन्होंने सफलता पाई। लेकिन, 1919 ई. में जालियाँवाला बाग कांड ने इनके हृदय को विदीर्ण कर दिया। फलतः इन्होंने ‘असहयोग आंदोलन’ का शंखनाद किया। बाद में 1930 ई. में ‘नमक आंदोलन’ की अगुआई की। लोग अँग्रेजों से ऊब चुके थे, अतः इन्होंने 1942 ई. में ‘अँग्रेजों, भारत छोड़ो’ का नारा बुलंद किया।

अंततः हारकर अँग्रेजों को भारत छोड़ना पड़ा और भारत 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ। ‘बुरा मत बोलो, बुरा मत सुनो, बुरा मत देखो’ के सिद्धांत पर चलने वाला सत्य, अहिंसा और शांति का यह पुजारी भी हिंसा का शिकार हो गया। नाथूराम गोडसे ने 30 जनवरी 1948 को इनकी हत्या कर दी। लेकिन, यह महामानव आज मरकर भी अमर है। हमें इनके द्वारा बताए मार्गों पर चलना चाहिए। यही इनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।


यह Essay on Mahatma Gandhi in Hindi | महात्मा गाँधी पर यह निबंध कैसा लगा। कमेंट करके जरूर बताये। अगर आपको इस निबंध में कोई गलती नजर आये या आप कुछ सलाह देना चाहे तो कमेंट करके बता सकते है।

Leave a Comment