3 Best Essay on Cow in Hindi | गाय पर निबंध

Essay on Cow in Hindi | गाय पर निबंध

हैल्लो दोस्तों कैसे है आप सब आपका बहुत स्वागत है इस ब्लॉग पर। हमने इस आर्टिकल में Cow in Hindi पर 3 निबंध लिखे है जो कक्षा 5 से लेकर Higher Level के बच्चो के लिए लाभदायी होगा। आप इस ब्लॉग पर लिखे गए Essay को अपने Exams या परीक्षा में लिख सकते हैं

10 lines Essay on Cow in Hindi

  1. गाय (Cow) एक पालतू पशु है।
  2. इसके चार पैर, दो कान, दो सिंग, तथा एक लंबी पूछ होती है। इसका शरीर बड़ा होता है।
  3. यह दुनिया के हर कोने में पाई जाती है।
  4. अधिकांश गाय सफेद होती है। किंतु कुछ गाय भूरि काली भी होती है।
  5. यह हरी घास, चारा, चना तथा भूसा खाना पसंद करती है। गाय खेतों या मैदानों में चरती है।
  6. इसके चार थन होते हैं।
  7. यह हमें दूध देती है। गाय का दूध स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।
  8. इसके दूध से मक्खन दही तथा कि बनाए जाते हैं।
  9. गाय किसी का नुकसान नहीं करती है।
  10. इसके गोबर से खाद बनाई जाती है।

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Essay on Cow in Hindi (150 Words)

गाय (Cow) एक शांतिप्रिय घरेलू जानवर है इसके चार पैर, दो कान, दो आंखें, दो सींग, एक विशाल शरीर और एक झबबेदार पूछ होती है इसके खूर फटे होते हैं। यह संसार में सभी जगह पाई जाती है। यह विभिन्न रंगों की होती है। कुछ उजली कुछ काली और कुछ मिली-जुली रंगों की होती है। गाय घास, पुआल, भूसा, खली आदि खाती है।

लेकिन वह घास को अधिक पसंद करती है। गाय मनुष्य के लिए लाभदायक है। गाय हमें दूध देती है। इसके दूध को बच्चे, जवान और बूढ़े सभी पसंद करते हैं। दही, मक्खन, छेना, मिठाई आदि इसके दूध से तैयार होते हैं। यह में बछड़े भी देती है। गाय का बछरा खेत जोतता है। इसके मरने के बाद इसके चमड़े से जूते, थैले, बेल्ट और अन्य वस्तुएं तैयार की जाती है। गाय एक पवित्र पशु है। हिंदू धर्म में इसे गौ माता माना जाता है।

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Essay on Cow in Hindi (500 Words)

भूमिका

गाय मेरे लिए पशुमात्र नहीं, पालतू प्रिय जानवर नहीं, वरन् पूज्य प्राणी है। ज्योंही मेरी टष्टि इसकी ओर जाती है, मेरा रोम-रोम इसकी पूजा के लिए पुलकित हो उठता है।

परंपरा

सधि के शुभारम्भ से ही हमारे देश में गो-पूजा होती रही है, उसके माहात्म्य कान होता रहा है। यदि महाराज दिलीप नन्दिनी नामक गाय की सेवा न करते, तो फिर उनके रघु-जैसा प्रतापी पुत्र कैसे होता? और, जब रघु नहीं, तो रघुवंश कैसे चलता? और, रघुवंश नहीं चलता, तो पुरुषोत्तम राम का रामराज्य कैसे सम्भव हो पाता? यदि कृष्ण-कन्हैया गोकुल में गो-सेवा नहीं करते, यदि उसके दूध से उनका शरीर पष्ट नहीं होता, तो वे किस प्रकार कंस का संहार कर पाते? हमारे प्रभु ने गाय की आराधना की है, यही क्या कम रहस्यपूर्ण है, कम महत्त्वपूर्ण है!

उपयोग

चाहे लौकिक दृष्टि हो या पारलौकिक, गाय का महत्त्व निर्विवाद है। लौकिक दृष्टि से गो-दुग्ध में इतने प्राणद तत्त्व हैं कि उनसे हमारे शरीर का पूर्ण पोषण होता है। जब हमारी जननी अशक्त हो जाती है, तब गौ अपने दूध द्वारा हमें जीवनदान करती है।

वैज्ञानिक दृष्टि से इसमें इतने प्रोटीन और विटामिन हैं कि इससे उत्तम पेय और खाद्य की कल्पना भी नहीं की जा सकती। दुग्धकल्प, दधिकल्प से तो अनेक असाध्य रोग दुर किये जाते हैं। इतना ही नहीं, गोरस के बिना तो भोजन के सब रस ही नीरस है। सारे दुर्लभ मिष्टान्नों के मूल में तो गोदुग्ध ही है न!

महत्व

हमारे जन्म-ग्रहण से मत्यु तक-कोई ऐसा अनुष्ठान, यज्ञ, उत्सव, त्योहार नही हैं। जिसमें गाय की आवश्यकता न पड़ती हो। पंचगव्य, अर्थात् गाय का दूध, दही, घृत, गोबर और मूत्र – ये पाँचों पदार्थ हमारे हर धर्म – कर्म में अनिवार्य हैं। अत्र-ब्रह्म की प्राप्ति में इसका बेटा बैल ही हमारा सबसे बड़ा सखा और सहायक है। अब तक वह कृषि-संस्कृति का मेरुदण्ड रहा है। बैलों के जोड़े ही सामान्य जनता के रथवाह हैं। पारलौकिक दृष्टि से, यदि मरने के बाद भी गौ की पूछ नहीं पकड़ते, तो भयानक वैतरणी से हम पार कैसे पा सकते हैं ?

वैदिककाल में भी जब कोई अतिथि घर आता था, तो ऋषि गाय के दूध से उसका स्वागत करते थे, इमलिए अतिथि को ‘गोधन’ कहते थे। आज भले ही हम अतिथियों के आगमन पर चाय के पास जायँ, किन्तु वह तभी स्वीकार्य हो पाती है, जब उसकी कालिमा में दुग्ध अपनी उपस्थिति से प्रीति की लालिमा छिटका देता है। यही कारण है कि ‘मही’ की इस दुलारी बेटी गौ को ‘माहेयी’ कहा गया, स्वर्ग की इस लाड़ली को ‘सौरभेयी’।

निष्कर्ष

हमारे लिए यह ‘माता’ भी है, ‘कामधेनु’ भी। यह हमारा पालन-पोषण, जीवन-रक्षण ही नहीं करती, वरन् अनन्त अभिलाषाओं की पूर्ति भी करती है। कितना कष्ट होता है जब कोई जालिम ‘गोमेध’ के गलत अर्थ की दुहाई देकर ‘गोहत्या करता है। ‘गोमेध’ का जो वास्तविक अर्थ नहीं जानते, उन्हें श्रीअरविन्द का ‘वेद-व्याख्यान’ अवश्य पढ़ना चाहिए। गाय का एक पर्याय ‘अघ्या’ है, जो इसकी अवध्यता की सम्पुष्टि करता है।

गाय हमारी माता है, देवी है; यह हमारे लिए शिवा है, धात्री है, ईश्वरी है। काश ! रसखान का स्वप्न हमारे लिए साकार होता

आठह सिद्धि नवौ निधि को सुख
नन्द की गाइ चराइ बिसारौं।


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जीवनी पढ़ें अंग्रेजी भाषा में – Bollywoodbiofacts

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