Hatim Tai and 5th Question full Story in Hindi | हातिमताई और पांचवा सवाल

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Hatim Tai and 1st Question full Story in Hindi
| हातिमताई और पहला सवाल
Hatim Tai and 2nd Question full Story in Hindi | हातिमताई और दूसरा सवाल


Hatim Tai and 5th Question full Story in Hindi | हातिमताई और पांचवा सवाल

अब हातिम हुस्नबानू के पांचवें सवाल का उत्तर लाने के लिए आगे ही चलता गया । थोड़े दिन बाद वह एक शहर में पहुंचा । वहां के निवासी उसे बादशाह के सम्मुख ले गये।

बादशाह ने कहा-तू कहां से आया है और कहां जाएगा? हातिम ने उत्तर दिया-बरखज सौदागर की बेटी हुस्नबानू ने शाहाबाद से कोहनिदा का संदेश लेने भेजा है । यदि आप इसके विषय में कुछ जानते हों तो मुझे बता दो बड़ी कृपा होगी । बादशाह ने कहा-कोई कोहनिदा का संदेश नही जो तुझे बता दूं, परन्तु हां कुछ दिन तू यहां निवास कर तो अपने आप जान जाएगा । यह बात हातिम की समझ में आ गई और वह उसी शहर में ठहर गया।

एक दिन दरबार मैं बैठे हुए बादशाह और हातिम कुछ वार्तालाप कर रहे थे कि अचानक आवाज सुनाई पड़ी (जल्दी आ, जल्दी आ) यह सुनकर शहर से एक युवक दौड़ने लगा। तो उसके घर वालों ने तत्काल ही भागकर उसे चारों ओर से घेर लिया । देखा तो उसका मुंह लाल पड़ रहा था और . कोहनिदा को भागा जाता था। हातिम ने भी यह चरित्र देखा तो पूछने लगा-भाइयों इस मनुष्य को क्या हो गया है?

कई लोगों ने बताया इसके लिए कोहिनिदा से निमंत्रण आया है। कुछ सोचकर हातिम ने उसे पकड़ लिया और पूछने लगा-अरे भैया तू सबको कहां भगाये लिये जाता है कुछ बता तो सही। परन्तु उसने कुछ भी उत्तर न दिया और हातिम के हाथ से छूटकर पहाड़ की ओर भाग गया ।

यह देख हातिम भी उसके पीछे भागा । इतने में वह यवक और पहाड दोनों ही लोप हो गए । तब हातिम नगर में लौट आया । तब हातिम ने कहा-क्यों भाई उस युवक की चिन्ता नहीं और तुम आनन्द मना रहे हो ।

यह सुन लोग बोले-भाई, हमारे देश की ऐसी रीत नहीं है, कि जाने वाले के लिए कोई रोवे या आंसू बहावे । तू क्यों चिन्ता करता है । और पन्द्रह मनुष्य हातिम के सामने गए मगर लौट कर कोई नहीं आया जो वहां का कुछ संदेश दे । अब जिन लोगों के साथ हातिम बैठता उठता था उनमें से भी एक युवक का नाम हातिम था । इन दोनों में परपस बड़ी गहरी मित्रता हो गई थी। होनाहार बलवान है । वहां के हातिम को कोहनिदा से बुलावा आया और सबको छोड़ भागने लगा। उसके घर वाले उसके पीछे लगे। जिसमें से हातिम भी था।

हातिम ने प्रण कर लिया चाहे जो हो, पर इसका साथ नहीं छोडूंगा। दोनों हाथों से मित्र हातिम को हातिम ने जेट भर ली। निदान वह सब लोग एक जगह खड़े रहे और वह दोनों पर्वत के नीचे आ पहुंचे । उसने बहुतेरा बल किया कि इस हातिम से छूट जाए परन्तु उसने उसे नहीं छोड़ा। दोनों पर्वत पर चढ़ गए । वहां एक कोठी था । सो फिर दोनों ही एक खिड़की द्वारा उसमें घुस गए । उधर वह दोनों जब कोठी के भीतर पहुंचे तो पहले तो एक हरी घास की जमीन मिली जिसमें पांव रखते ही वह युवक पछाड़ खाकर गिर पड़ा।

हातिम ने बहुतेरा उठाया परन्तु उठ न सका । थोड़ी देर पीछे उसके प्राण पखेरू उड़ गए और जमीन फट गई और वह युवक समा गया । फिर जमीन पहले की तरह ज्यों की त्यों हो गई और वहां भी घास उग आई । हातिम ने सोचा कि मैंने अब कोहनिदा का संदेश पा लिया। यहां से चलना चाहिए। परन्तु सात दिन खोजने पर भी खिड़की न मिली ।

भूख-प्यास से व्याकुल एक ओर चलता ही गया तो नदी मिली जिसमें चांदी क समान श्वेत जल बह रहा था । उस नदी में एक नाव पड़ी थी, उसी के सहारे किनारे पर दूसरी ओर आ गया और चल दिया। वहां से चलकर थोड़े ही दिन में हातिम हुस्नबानू के शहर शाहाबाद पहुंच गया ।

हुस्नबानू ने सुना तो हातिम को कुर्सी पर बैठा दिया । हुस्नबानू कहने लगी-कोहनिदा का क्या संदेश लाए ? तब हातिम ने इस यात्रा का सारा सामचार कह सुनाया और विश्वास के लिए हाथ के नख दिखाए जो अभी चांदी के थे। हुस्नबानू धन्य-धन्य पुकार उठी और बड़ी ही प्रसन्न हुई। हातिम वहां से चलकर मुनीरशामी के पास पहुंचा और दस-बारह दिन ठहरा, फिर नहा-धोकर नवीन वस्त्र पहन हुस्नबानू के पास पहुंचा और बोला-हे बरवज सौदागर की बेटी, अब तेरा छठा सवाल क्या है मुझे बता ?

हुस्नबानू-बोली-जल मुर्गी समान एक मोती मेरे पास है, ऐसा ही दूसरा मोती लाकर दे । हातिम ने कहा-उस मोती को मुझे दिखा दीजिए, तभी तो दूसरा मोती इसके बराबर का लाऊंगा।

यह सुनकर हुस्नबानू ने वह मोती दिखा दिया । तब हातिम ने कहा-इसका मुझे चांदी के बराबर बनाकर दे ।

सुनकर हुस्नबानू ने मोती चांदी का बनाकर हातिम को दिया और हातिम ईश्वर का नाम ले उसका जोड़ा मिलाने के लिए चल दिया ।


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