वाक्य (Vakya) (वाक्य-विचार) – Paribhasha, Bhed और उदाहरण – Hindi Vyakaran

हल्लो दोस्तों कैसे है आप सब आपका बहुत स्वागत है इस ब्लॉग पर। हमने इस आर्टिकल में Vakya (वाक्य) in Hindi डिटेल में पढ़ाया है जो कक्षा 5 से लेकर Higher Level के बच्चो के लिए लाभदायी होगा। आप इस ब्लॉग पर लिखे गए Vakya (वाक्य) in Hindi को अपने Exams या परीक्षा में इस्तेमाल कर सकते हैं


Vakya-Hindi-Vyakaran

ऊपर की दो पंक्तियों में कई शब्द हैं। वे आपस में मिलकर पूरा अर्थ बतला रहे हैं। हर पक्ति के अन्त में पूर्ण विराम है। ये वाक्य हैं।

वाक्य किसे कहते है – Vakya Kise Kahte hai | Vakya ki Paribhasha

वह शब्द समूह जिससे पूरी बात समझ में आ जाए वाक्य कहलाता है।

वाक्य के भाग – Vakya ke Bhag

उद्देश्य

वाक्य में जिसके विषय में कुछ कहा जाए, उसे उद्देश्य कहते हैं।
जैसे – सूर्य निकल रहा है। यहाँ ‘सूर्य’ शब्द ‘उद्देश्य है।

विधेय

उद्देश्य के विषय में जो कुछ कहा जाए उसे विधेय कहते हैं।
जैसे -सूर्य निकल रहा है। यहाँ निकल रहा है ‘विधेय’ है।

उद्देश्य का विस्तार

कई बार वाक्य में उद्देश्य का परिचय देने वाले अन्य शब्द भी आते हैं। ये शब्द उद्देश्य का विस्तार कहलाते हैं।
जैसे – काला कुत्ता रोटी खाता है। यहाँ ‘काला‘ शब्द उद्देश्य का विस्तार है, क्योंकि यह उद्देश्य के बारे में कुछ बता रहा है।

उद्देश्य का विस्तार नीचे लिखे शब्दों द्वारा प्रगट होता है:

विशेषण – सुन्दर फूल सबको प्रसन्न करता है।

सम्बन्ध कारक से – बालकों की भीड़ ने मुरली वाले को घेर लिया।

वाक्यांश से – काम जानने वाला कारीगर मिल गया है।

विधेय का विस्तार

मूल विधेय’ को पूर्ण करने के लिए जिन शब्दों का प्रयोग किया जाता है, वे विधेय का विस्तार कहलाते हैं।
जैसे – वह अपने पैन से लिखता है।

यहाँ ‘अपने‘ शब्द विधेय का विस्तार है। विधेय का विस्तार नीचे लिखे शब्दों द्वारा होता है :

कर्म का विस्तार – सरस्वती अच्छी पुस्तकें खरीदती है। यहाँ अच्छी’ कर्म (पुस्तक) का विस्तार है।

क्रिया का विस्तार – गीताञ्जली मन लगा कर पढ़ती है। यहाँ ‘मन लगा’ कर क्रिया (पढ़ती है) का विस्तार है।

रचना के अनुसार वाक्य के भेद – Rachna ke aadhar par vakya ke bhed

  1. सरल वाक्य अथवा साधारण वाक्य (Simple Sentence)
  2. संयुक्त वाक्य (Compound Sentence)
  3. मिश्रित वाक्य (Complex Sentence)

सरल वाक्य किसे कहते है – Saral Vakya

जिस वाक्य में एक उद्देश्य और एक विधेय हो, सरल वाक्य कहलाता है। इसमें उद्देश्य तथा विधेय का विस्तार हो सकता है।
जैसे – रमेश दूध पीता है। (एक उद्देश्य, एक विधेय) अच्छा बालक मीठा दूध पीता है। (उद्देश्य का विस्तार, विधेय का विस्तार)

संयुक्त वाक्य किसे कहते है – Sanyukt Vakya

जो वाक्य दो या दो से अधिक साधारण वाक्यों से बनें, परन्तु वे एक दूसरे पर आश्रित न हों, वे संयुक्त वाक्य होते हैं।
जैसे – मोहन कल चला गया और सोहन आज चला गया। यहाँ ‘और‘ शब्द दो प्रधान वाक्यों को जोड़ता है।

संयुक्त वाक्य के प्रकार

संयोजक किसे कहते है

जब एक साधारण वाक्य दूसरे साधारण वाक्य में संयोजक अव्वय (और, तथा, एवं) द्वारा जुड़ता है।
जैसे – मोहन आया और सोहन चला गया।

विभाजक किसे कहते है

जब साधारण अथवा मिश्र वाक्यों का परस्पर भेद या विरोध का सम्बन्ध रहता है।
जैसे – रमेश तो आया परन्तु सुरेश नहीं आया। (यहाँ ‘परन्तु‘ शब्द विभाजक है।)

विकल्प सूचक किसे कहते है

जब दो बातों में से किसी एक को मंजूर करना होता है।
जैसेया तो मैं जीतूंगा या मैं खेलना बन्द कर दूंगा। (यहाँ ‘या‘ शब्द विकल्प सूचक है।)

परिणाम बोधक किसे कहते है

जब एक साधारण वाक्य दूसरे साधारण या मिश्रित वाक्य का परिणाम होता है।
जैसे – मुझे आज ज्वर है, इसलिए मैं आज स्कूल नहीं आ सकता। (यहाँ ‘इसलिए‘ शब्द परिणाम सूचक है।)

मिश्रित वाक्य – Mishra Vakya

जो दो या दो से अधिक वाक्यों से बना हो, उसे मिश्रित वाक्य कहते हैं। इसमें एक वाक्य प्रधान होता है और शेष वाक्य आश्रित होते हैं।
जैसे – माता जी ने कहा, “बच्चो, वहाँ जाओ’। माता जी ने कहा-प्रधान वाक्य। । ‘बच्चो, वहाँ जाओ’। यह आश्रित वाक्य हैं।

आश्रित वाक्य के प्रकार

  1. संज्ञा उपवाक्य (Noun Clause)
  2. विशेषण उपवाक्य (Adjective Clause)
  3. क्रिया विशेषण उपवाक्य (Adverbial Clause)

संज्ञा उपवाक्य किसे कहते है

जब आश्रित उपवाक्य किसी संज्ञा अथवा सर्वनाम के स्थान पर आता है तब वह संज्ञा उपवाक्य कहलाता है।
जैसे – मुझे आशा है कि आज वर्षा होगी।
यहाँ कि आज वर्षा होगी’ संज्ञा उपवाक्य है।

विशेषण उपवाक्य किसे कहते है

जो आश्रित उपवाक्य मुख्य उपवाक्य की विशेषता बतलाता है, वह विशेषण उपवाक्य कहलाता है।
जैसे – वह पुस्तक जो मेज़ पर रखी है, मेरे चाचा जी ने मुझे दी।।
यहाँ ‘पुस्तक’ जो मेज़ पर रखी है’ यह विशेषण उपवाक्य है।

क्रियाविशेषण उपवाक्य किसे कहते है

जब आश्रित उपवाक्य प्रधान उपवाक्य की क्रिया की विशेषता बताता है, तब वह क्रियाविशेषण उपवाक्य कहलाता है।
जैसे – ‘जब मैं रमेश के पास गया, वह खेल रहा था।’ इस वाक्य में जब मैं रमेश के पास गया’ क्रियाविशेषण उपवाक्य है।

वाक्य – परिवर्तन | Vakya Parivartan

वाक्य के अर्थ में किसी प्रकार का परिवर्तन किये बिना उसे एक प्रकार के वाक्य से दूसरे प्रकार के वाक्य में | परिवर्तन करना ‘वाक्य परिवर्तन’ कहलाता है। जैसे –

साधारण वाक्यसंयुक्त वाक्य
राम पढ़ रहा है।
श्याम लिख रहा है।
राम पढ़ रहा है और श्याम लिख रहा है।
सवेरे तेज़ वर्षा होने के कारण
मैं स्कूल नहीं जा सकता।
सवेरे तेज़ वर्षा हो रही थी, इसलिए मैं स्कूल नहीं जा सका।
वह उपन्यासकार के अतिरिक्त
अच्छा वक्ता भी है।
वह अच्छा उपन्यासकार है और अच्छा वक्ता भी है।
साधारण वाक्यमिश्रित वाक्य
(क) राम बड़ा वीर था।
(ख) उसने रावण को मारा।
राम, जो बड़ा वीर था, उसने रावण को मारा।
धन के बिना मनुष्य कुछ नहीं कर सकता।यदि मनुष्य के पास धन न हो, तो वह कुछ नहीं कर सकता।
उस लम्बू को देखते ही, मुझे अमिताभ बच्चन याद आ गया है।जब मैं उस लम्बू को देखता हूँ मुझे अमिताभ बच्चन याद आता है।
मुझे देखकर वह हँसा।ज्योंही उसने मुझे देखा त्योंही वह हंसा।

अर्थ के अनुसार वाक्य के प्रकार | Arth ke aadhar par vakya bhed

  1. विधानार्थक वाक्य (Assertive Sentence)
  2. नकारात्मक वाक्य (Negative Sentence)
  3. आज्ञार्थक वाक्य (Sentence indicating Command)
  4. प्रश्नार्थक वाक्य (Interrogative Sentence)
  5. इच्छार्थक वाक्य (Illative Sentence)
  6. संदेहार्थक वाक्य (Sentence indicating doubt)
  7. संकेतार्थक वाक्य (Conditional Sentence)
  8. विस्मयादिबोधक वाक्य (Exclamatory Sentence)

विधानार्थक वाक्य

जब वाक्य में किसी बात का होना पाया जाय, उसे विधानार्थक वाक्य कहते हैं।
जैसे – रमेश मेरा सबसे प्यारा मित्र है।

नकारात्मक वाक्य

जिस वाक्य में किसी बात के न होने का बोध हो, उसे नकारात्मक वाक्य कहते हैं।
जैसे – रमेश मेरा सबसे प्यारा मित्र नहीं है।

आज्ञार्थक वाक्य

जिस वाक्य में आज्ञा, उपदेश अथवा आदेश देने का बोध हो, उसे आज्ञार्थक वाक्य कहते हैं। जैसे – खड़े हो जाओ। वहाँ चले जाओ।

प्रश्नार्थक वाक्य

जिस वाक्य में प्रश्नात्मक भाव प्रगट हो, उसे प्रश्नार्थक वाक्य कहते हैं।
जैसे – उसका क्या नाम है? तुम कहाँ गये थे?

इच्छार्थक वाक्य

जिस वाक्य से इच्छा या आशीष के भाव का बोध हो, उसे इच्छार्थक वाक्य कहत हैं।
जैसे – दीर्घायु हो। जुग-जुग जीओ।

सन्देहार्थक वाक्य

जिस वाक्य में सन्देह का बोध हो. उसे संदेहार्थक वाक्य कहते हैं।
जैसे – सभवतः वह घर पहुँच गया होगा।

संकेतार्थक वाक्य

जिस वाक्य से संकेत का बोध हो, उसे संकेतार्थक वाक्य कहते हैं।
जैसे – यदि तुम परिश्रम करते, तो पास हो जाते।

विस्मयादिबोधक वाक्य

जिस वाक्य से विस्मयादि के भाव प्रगट हों, उसे विस्मयादि बोधक वाक्य कहते हैं।
जैसे – अहा! मज़ा आ गया। हाय! बेचारा डूब गया।


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